तीनों नए कृषि कानून रद्द पर? सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला.

तीनों नए कृषि कानून रद्द होंगे या कायम रहेंगे? सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला
तीनों नए कृषि कानून रद्द होंगे या कायम रहेंगे? सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला

नई दिल्ली । भारत सरकार के द्वारा लागू किए गए तीन नए किसी कानून बने रहेंगे या फिर रद्द हो जाएंगे, आज यानी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के पश्चात इस प्रश्न का जवाब मिल जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ-साथ पिछले 47 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों व दिल्ली की सीमाओं पर जमे आंदोलनकारी किसानों का आंदोलन भी समाप्त हो जाएगा.

भारत सरकार के बचाव में नरेंद्र सिंह तोमर ने दी सफाई

कल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के पश्चात केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट लोकतांत्रिक व्यवस्था में सबसे ऊंचा है. सुप्रीम कोर्ट की ओर हमारी तरफ से प्रतिबद्धता है. किसान आंदोलन के चलते बातचीत कर समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार जो कुछ कर सकती थी वह भारत सरकार ने किया. इस दौरान नए कृषि कानूनों में संशोधन करने का प्रस्ताव भी दिया गया था. लेकिन किसान यूनियन अपनी एक ही मांग पर अड़ी हुई है कि इन तीनों कृषि कानूनों को पूर्ण रूप से रद्द किया जाए. किसान संगठनों से कहा कि आप बताइए कि किस प्रावधान में आपको आपत्ति है, हम उस में संशोधन कर देंगे. हमें आशा है कि 15 तारीख को किसान बातचीत को आगे बढ़ाएंगे और कोई ना कोई हल अवश्य निकल आएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से जताई नाराजगी

सोमवार को किसान विरोध प्रदर्शन व 3 नए कृषि कानूनों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एस ए बोबडे ने भारत सरकार पर नाराजगी जाहिर की और कहा कि आप बताइए कि इन कानूनों पर रोक लगाएंगे या नहीं? आप नहीं लगाते तो हम लगा देंगे. जिस प्रकार से भारत सरकार इस मामले को नियंत्रित कर रही है, हम उससे बिल्कुल भी खुश नहीं है. हमें पता नहीं कि सरकार किस प्रकार इस मसले के साथ डील कर रही है. कानून को बनाने से पहले किस से विचार विमर्श किया. कितने समय से कह रहे हैं कि बातचीत कर रहे हैं तो बताइए क्या बात हो रही है?

जानिए मामले के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

इस संबंध में चीफ जस्टिस एस ए बोबडे ने कहा कि प्रदर्शन स्थल पर स्थिति बहुत ही खराब होती जा रही है. किसान आत्महत्या करने लगे हैं. विरोध प्रदर्शन के स्थल पर पानी के अतिरिक्त अन्य बुनियादी सुविधाओं का बहुत अधिक अभाव है. कोरोना जैसी महामारी के दौर में सोशल डिस्टेंसिंग का बिल्कुल भी पालन नहीं किया जा रहा है. मैं किसान संगठनों से प्रश्न करना चाहता हूं कि इस ठंड में आखिर बूढ़े लोग और महिलाएं प्रदर्शन में क्या कर रहे हैं? उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी नागरिक को सुप्रीम कोर्ट यह आदेश नहीं दे सकता कि वह प्रदर्शन ना करें. हां, इतनी बात अवश्य कह सकता है कि आप इस स्थान पर प्रदर्शन करें और इस पर ना करें. यदि कुछ घटित हो जाता है तो उसके जिम्मेदार सब होंगे. हम यह बिल्कुल भी नहीं चाहते कि हमारे हाथ किसी के रक्त से रंग जाए.

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